नासा-ज्वर
परिचय :
नाक के छेद के अंदर लहसुन या प्याज की फली के समान सूजन आ जाती है जिसे नासा नाम से जानते हैं। यह नाक के एक या दोनों छेदों में हो सकता है। नासा रोग होने के पहले अक्सर सर्दी हुआ करती है। सबसे पहले रोगी के गर्दन में थोड़ा दर्द होता है इसके बाद शरीर में दर्द होता है। फिर आंखें और चेहरा लाल हो जाता है। बुखार भी हो जाता है। शरीर की त्वचा में जलन होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने की अवस्था को नासाज्वर कहते हैं। यह रोग एकाएक ही शुरू होता है और एकाएक ही ठीक हो जाता है।
इस रोग के कष्टों को तुरंत दूर करने के लिए बहुत से लोग नासा को फोड़ देते हैं अर्थात नाक के भीतर प्याज की तरह फूले हुए स्थान को सुई से छेद कर देते हैं। इस प्रकार के उपचार से तुरंत तो लाभ मिलता है लेकिन बार-बार इस रोग के होने पर परेशानियां बढ़ने लगती है।
नासा-ज्वर का विभिन्न औषधियों से चिकित्सा-
- बेलेडोना- इस रोग को ठीक करने के लिए यह सबसे प्रमुख औषधि है। इस औषधि से उपचार करने के लिए इस औषधि की 1x मात्रा का उपयोग फायदेमंद है।
- सैंगुइनेरिया- सैंगुइनेरिया- θ औषधि का उपयोग नासा-ज्वर का उपचार करने के लिए किया जा सकता है। इस रोग को ठीक करने के लिए कैल्के-कार्ब-6 शक्ति और मेलिलोटस-ऐल्ब-6 शक्ति की मात्रा का उपयोग करना लाभदायक होता है।
- कैडमियम-सल्फ- नाक से बदबूदार स्राव होता है, रोगी अपना नाक सिकुड़ नहीं पाता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इस औषधि की 3 या 30 शक्ति की मात्रा का उपयोग कर सकते हैं।
40 फास्फोरस- छूने से ही नाक से खून बहने लगता है, नाक से हरा या पीला कफ जैसा पदार्थ बहता है। इस प्रकार के लक्षण होने पर चिकित्सा करने के लिए इस औषधि की 3 शक्ति से उपचार करें।
- सोरिनम- नाक से खून बहने का पुराना रोग होना, सर्दी महसूस होना, कमजोरी अधिक महसूस होना। ऐसे लक्षण होने पर रोग को ठीक करने के लिए इसकी 30 शक्ति का उपयोग करने से लाभ मिलता है। यह औषधि किसी भी तरह के स्राव जो बदबूदार होता है उसे दूर करता है। इस रोग को ठीक करने के लिए ओपियम, थूजा, कैलि-बाइक्रोम, मर्क-आयोड, फास्फोरस या टियुक्रियम औषधियों का उपयोग कर सकते हैं।